I will rise again..

You may snatch my breath and tear my life apart.
You may try to stop the beating of my fetal heart.
You may try to end my existence inside the womb.
But my friend! I will rise again.

You may try to burn my wings and lock me down in the cage.
You may throttle my pride and suppress me with your rage.
You may try to shove me inside the dark.
But you can’t stop me from rising again.

Does it hurt to see me evolve?
Does my one brave step cause your fall?
Does my wild laughter outshines your individuality?
Or does it force you to bend down your morality?

All these years,
I tried to save me from your prying eyes.
I tried to act normal while you were gazing between my thighs.
But now, no more!
Gag me, bruise me or burn me..
I will breathe again from those ashes.
You may end this life,
But I will rise again.

I wonder why?

It is raining in the chilly winter night.
I heard the sound of its arrival before the winds start buzzing.
Tiny droplets are slipping down on my face,
It was warm at first.
But I wonder why?

It is a dark cloudy night.
I looked up at the sky.
I didn’t see the droplets rained down.
My eyes were blurry.
A warm driblet sloped down to my cheeks.
But I wonder why?

The freezing stream is showering the road,
Waking up the sleeping branches with a roar.
I can hear the sound when they break the shackles of the cloud.
They were crying, howling and celebrating for a while.

I drenched myself in their agony,
Listened calmly when they pour their heart out.
They were slipping down through my body and met the ground.

I felt a warm drop sliding on my cheeks.
I looked up at the sky.
My vision was blurry.
I didn’t see the droplets rained down.
But I wonder why?

क्या सचमुच बज गई है ‘मंदी’ के खतरे की घंटी?

क्या आप ‘मंदी’ की दस्तक से अंजान हैं या फिर इसे नजरअंदाज कर रहे हैं? क्या आप इस आने वाले संकट का सामना करने के लिए तैयार हैं या फिर इसी ऊहापोह में हैं कि आप पर इसका क्या असर होगा. एक आम आदमी जिसने 1991 या फिर 2008 में मंदी की मार नहीं झेली है, वह इस आने वाले संकट को किस तरह से देख रहा है, इसे समझना बहुत जरूरी है. लेकिन सवाल है कि क्या सचमुच खतरे की घंटी बज चुकी है? वे संकेत क्या हैं जो इशारा कर रहे हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था खतरे में है?

आपको बता दें कि पिछले साल मार्च के महीने में हुए एक इंवेट ‘आस्क मी एनीथिंग’ (Ask Me Anything) में माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने कहा था कि 2019 में दुनियाभर में मंदी दस्तक देगी. उनका कहना था कि दुनिया के सबसे सफल इन्वेस्टर वॉरने बफेट से भी उनकी इस बारे में बात हुई है. अगर आपने ‘द बिग शॉट’ और ‘मार्जिन कॉल’ जैसी फिल्में देखी हैं तो आप समझ पाएंगे कि मंदी की मार किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए कितनी घातक साबित हो सकती है. लेकिन क्या वजह है कि इस चेतावनी के बाद भी हम इस आने वाले संकट से बेखबर रहें? जानिए, अर्थव्यवस्था में मंदी आने से पहले मिल रहे संकेतों को आप किस तरह पहचान सकते हैं.

कैसे जानें कि आने वाली है मंदी?

आर्थिक विकास दर का गिरना: अगर किसी अर्थव्यवस्था की विकास दर या GDP तिमाही-दर-तिमाही लगातार घट रही है, तो इसे आर्थिक मंदी का बड़ा संकेत माना जाता है. हाल ही में शुक्रवार को पिछले तिमाही के विकास दर के आंकड़े जारी हुए हैं. 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ गिरकर 5 प्रतिशत पर आ गई है.पिछले पांच सालों में इतनी गिरावट कभी दर्ज नहीं कि गई है. GDP की ये ग्रोथ रेट कहीं ना कहीं मंदी की तरफ इशारा जरूर कर रही है.

शेयर बाज़ार में गिरावट: इसी साल जुलाई के महीने में सेंसेक्स में भी भारी गिरावट देखने को मिली. जिस वजह से तीस बड़ी कंपनियों के 17 लाख करोड़ रुपए डूब गए थे. यह देश की अर्थव्यवस्था को करारा झटका था. शेयर बाजार में लगातार हो रही गिरावट को भी आर्थिक मंदी के रूप में ही देखा जाता है.

कारोबार पर असर: देश की प्रमुख ऑटो कंपनी टाटा मोटर्स को इस तिमाही में 3 हजार करोड़ रुपए की चपत लगी है. पिछले साल के मुकाबले दोगुना घाटा हुआ है. ऑटो इंडस्ट्री में लगातार नौ महीने से गिरावट दर्ज हो रही है. जुलाई में कार और बाइक की बिक्री में 31 फिसदी की गिरावट आई. दरअसल, मंदी के दौरान लोग जरूरत की चीजों पर हो रहे खर्च को काबू करने की कोशिश करते हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि वाहनों की बिक्री घटना मंदी का बड़ा संकेत है.

बेरोजगारी: अर्थव्यवस्था में मंदी आने पर रोजगार के अवसर भी घट जाते हैं. उत्पादन न होने की वजह से उद्योग बंद हो जाते हैं, जिसके चलते कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी करने लगती हैं. हाल ही में ऑटो सेक्टर से जुड़े साढ़े तीन लाख से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरी चली गई. इतना ही नहीं करीब 10 लाख लोगों की नौकरियां खतरे में है.

कंपनियों की निवेश में आई कमी: ‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नोटबंदी के बाद कंपनियों के निवेश में 60 प्रतिशत की कमी आई है. 2016-17 में कुल निवेश करीब 10 लाख करोड़ रुपए था, जबकि नोटबंदी के बाद ये आंकड़ा सीधा घटकर 4 लाख 25 हजार करोड़ पर सिमट गया. वरिष्ठ पत्रकार पूजा मेहरा का भी कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश को बहुत अहम माना जाता है. निवेश में आई कमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है और मंदी की बड़ी वजह बन सकती है.

मंदी की मार से खुद को कैसे बचाएं:

बचत करना है जरूरी: अगर आप इस मंदी के चपेट में नहीं आना चाहते हैं तो बचत करने पर ध्यान लगाएं. गैर जरूरी खर्चों से बचें. दुनिया के सबसे सफल इन्वेस्टर वॉरेन बफेट भी कहते हैं कि अगर आप बचत करना चाहते हैं तो जरूरी है कि आप पहले बचत करें फिर खर्च करें. इसका सीधा मतलब ये हुआ कि आप पहले बचत करें फिर बचे हुए पैसे को खर्च करें.

निवेश करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान:
निवेश को लेकर वॉरेन बफेट का कहना है कि किसी भी कंपनी में सिर्फ इसलिए निवेश न करें, क्यों उसमें तेजी है. बेसिक रूल फॉलो करना बहुत जरूरी है. आर्थिक मंदी के दौर में प्रॉपर्टी में निवेश करने से बचना चाहिए. साथ ही, निवेश उसी बिजनेस में करें, जिसकी समझ हो. रिस्क लेने से बचें.

जल्द से जल्द कर्ज चुकाएं:
अगर आपने होम लोन, कार लोन या फिर कोई और लोन लिया है, तो उसे जल्द से जल्द चुकाएं. क्योंकि अगर किसी वजह से आपकी नौकरी छूट गई तो आप बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं. साथ ही, मंदी में किसी भी तरह का लोन लेने से बचें.

डायरी: एक बिछड़े हुए दोस्त के नाम।

काश! मैंने तुम्हें उस दिन जाने से रोक लिया होता। ये कब की बात है, मुझे अब ठीक-ठीक याद भी नहीं। लेकिन, अब सोचती हूं कि अगर मुझे मालूम होता कि ये तुमसे मेरी आखिरी मुलाकात है, तो सच मानो! मैं तुम्हें कभी जाने नहीं देती। दिल में समेट कर रख लेती उस पल को और तुमको,हमेशा-हमेशा के लिए। मुझे होश भी नहीं रहा और देखते ही देखते तुम मुझसे इतनी दूर हो गई, जैसे हम पास कभी थे ही नहीं।

ये सबकुछ कितना अजीब है! मैंने ऐसे भविष्य की कभी कल्पना नहीं कि थी। मेरे अतीत, मेरे जीवन और मेरी जिंदगी की हर छोटी- बड़ी बातों में तुम मेरे साथ थी। मुझे मालूम नहीं, कब हमारे बीच इतनी दूरियां आ गई कि आज मुझे तुम्हारी होंठो की हंसी, तुम्हारी बातें सब एक ख्बाब सी लगती हैं। जैसे तुम कभी थी ही नहीं।

हां! मुझे पता है, ये मेरी ही गलती है। मुझे समझना चाहिए था। तुम्हें रोकना चाहिए था। मुझे समझना चाहिये था कि तुम्हारे ‘मैं ठीक हूँ’ कहने के पीछे हो सकता था कोई दर्द छिपा हो। जिसे मैंने यूँ ही जाने दिया। नए रिश्तों को सहेजने में इतनी मशगूल हो गयी कि तुम्हें मेरी जरूरत होगी, ये भी सोचना भूल गयी। लेकिन, तुमने मुझे कुछ नहीं कहा, न कोई शिकायत की ना कोई नाराजगी। बस मुझसे दूर होती चली गयी और मुझे भनक तक नहीं लगने दिया।

तुम्हें ये जानकर भले ही अजीब लगे, लेकिन आज भी जब मैं खुद को शीशे में देखती हूं, तो मेरा मुस्कुराता चेहरा मुझे तुमसा लगता है। जब भी खुद को समझने बैठती हूँ तो लगता है कि मैं ऐसी शायद तुम्हारी वजह से हूं। वो सभी उल्टे-सीधे ख्वाब तुम्हारे साथ कि वजह से तो थे। जो सपने मेरे अंदर कैद हैं, उसे मेरे अंदर पैदा करने वाली तुम ही तो थी। ये सच है! तुम्हें याद है जब हम साथ बैठकर अपने-अपने सपनों की बातें करते थे, तो मैं तुम्हें एकटक देखा करती थी। सोचती थी, कोई तुम्हारे जैसा कैसे हो सकता है। कितनी बातें हैं तुम्हें बताने को, जो मैं शायद कभी अपनी जुबां से नहीं बोल सकती। तुम्हें पता है ना, मैं नहीं बोल पाती।

शायद, तुम्हें ये बात झूठी लगे, लेकिन कभी-कभी तुम्हारी याद में, मैं रात में उठ कर बैठ जाती हूं। दिल करता है तुम्हें खोज निकालूं, तुम्हें ढूंढकर वापस अपने पास ले आऊं और घंटों तुमसे बात करूं, जो किये जाने कितने साल बीत गए। फेसबुक, इंस्टाग्राम घन्टो खंगालने के बाद थक कर बैठती हूं तो ऐसा लगता है शायद अब तुम्हें कभी वापस नहीं पा सकूँगी। तुमने खुद को हर किसी से इतना दूर कर लिया है,जैसे हमसे कभी कोई वास्ता ही नहीं रखना चाहती हो। मुझे पता है हमारे बीच आयी दूरियों को कम कर पाना इतना आसान नहीं, पर शायद तुम ऐसा करना अब चाहती भी नहीं हो। तुम्हें एक बात बताऊं, तुम्हारे जाने के बाद मैं कभी भी किसी से वैसी दोस्ती नहीं कर पाई, जैसी तुम्हारे साथ थी। और न शायद कभी कर पाउंगी। लेकिन, एक डर है मेरे अंदर क्या होगा उस दिन अगर तुम मुझे कभी मिली और वैसी न रही जैसी तुम मेरी यादों में हो! उस वक़्त शायद मेरी दिल को सबसे ज्यादा ठेस पहुँचे। इसलिए अब चाहती हूं कि तुम मुझे ना मिलो,कभी ना मिलो ताकि तुम्हारी दोस्ती की वो यादें वैसी ही बनी रहे, जैसे कि आज हैं, बिलकुल महफूज़।

I lost me.

oh …u lost me

I was there ..

Hiding myself behind the curtain ..

wiping my tears with dirty hands …

prayed to god to save me ..

But he didn’t …neither you …

Oh! U lost me that day ..

I still remember

When i came with ..

Broken heels ..

And ..

U made me stand whole day ..

prayed to god to help me..

But he didn’t …neither you..

Oh! U lost me that day..

but,

The day u sent me ..

far from yourself ..

I was yearning inside ..

u left me there …

Alone …

I cried whole night ..

Sprawled on floor …

But,this time ..

I didn’t pray ..

This was the day …

U actually lost me.

And I too.

Oh! U were there ,

But i lost me.